शैवाल

योग ऋषि बाबा रामदेव

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श्री राम-काव्य

राम कथा मन भावनी, पढ़ी सुनी बहुबार ।
कृपा करो माँ षारदा, लिखूँ हृदय अनुसार ॥

ऋध्दि-सिध्दि संग गणपति, रखें कृपा की कोर ।
है जीवन अवलम्ब अब, राम नाम की डोर ॥

षिव मानस में जन्म ले, जन मानस में व्याप्त ।
गंगा सी कलिमल हरे, जीव करे सुख प्राप्त ॥

नवीनतम प्रकाशन

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फलाहारी बाबा श्री गणेश गिरी का जीवन वृत्ता

श्री गणेश का ध्यान कर, बंदहु उमा-महेश ।
रहे सहायक षारदा, हर सब विघ्न क्लेश ॥ 01

श्री गणेश गिरी सन्त का, जीवन चरित महान।
मैं अज्ञानी, अल्प मति, कैसै करूँ बखान॥ 02

पर मुझको विष्वास यह, रखते प्रभु सब ध्यान ।
सभी कमी पूरी करें, राम-भक्त हनुमान॥ 03

भारत में था चल रहा, अंग्रेजों का राज ।
विफल क्रान्ति से दग्ध था, अपना सकल समाज॥ 04

सत्ताावन की क्रान्ति को, कुचल हुए मदमस्त।
अंग्रेजों के राज में, सूर्य न होता अस्त॥ 05